आइसक्रीम वाला
जब मै एक छोटी बच्ची थी,
उम्र मेरी कच्ची सी थी,
आइसक्रीम वाले की डुगडुगी,
लगती बहुत अच्छी सी थी |
तब देखा था मैंने एक सपना,
बड़े होकर कुछ और न करना,
सबसे अच्छा है बस,
एक आइसक्रीम वाला बनना|
सोचती थी,
मैं यह हर रोज,
होकर बड़ी बेचूंगी जब,
आइसक्रीम दूसरों को अपनी,
मिलेगी मुझे भी खाने को ढ़ेर |
सोचती थी ,
खाऊँगी आइसक्रीम मैं हर रोज,
भरकर अपना पूरा पेट,
तब होगी ना कोई रोक टोक,
ना ही देना होगा उसका कोई मोल |
सोचती थी ,
होगी मेरी आइसक्रीम सबसे अनमोल,
जिसमे होगा दूध, चीनी और
तरह तरह के फलों का मेल,
लाल, पीली, नारंगी और सफेद |
पता नहीं था,
इतनी मुश्किले है जिंदगी में उसकी,
घूम घूम कर बेचता है,
वह आइसक्रीम हर रोज़,
चाहे हो मौसम का कितना भी ख़ौफ़|
पता नहीं था,
होते हुए इतनी सारी आइसक्रीम पास,
जो लाये दुसरे बच्चों के मन में मिठास,
रहता है हरदम क्यों इतना उदास|
पता नहीं था,
नहीं पता स्वाद आइसक्रीम का उसको,
उसने तो क्या कभी चखी नहीं है,
आइसक्रीम बच्चों ने उसके।
पता नहीं था,
रहता है हरदम वह यही सोच,
रह ना जाए बच्चे उसके आज,
रोटी को मोहताज|
पता नहीं था,
है वह अनजान,
आइसक्रीम के अनोखे स्वाद से,
क्योंकि जिंदगी गुजारी पूरी उसने,
करते सिर्फ रोटी की खोज |
देखा था मैंने भी एक सपना।
सुरेखा
6.1.19
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