मेरे वो और उनके खर्राटें
मेरे वो और उनके दमदार खर्राटे,
हर रात एक नया ही राग सुनाते ,
कल रात तो हुया एक नया अजूबा ,
सुनने को मिला एक राग बहुत ही अनूठा .
कभी बजाते थे सीटी शताब्दी ट्रैन की तरह,
तो कभी निकालते थे आवाज़ किसी मेम की तरह,
कभी छेड़ते थे तान पुरानी फटफटी की तरह ,
तो कभी गाते राग मल्हार तानसेन की तरह .
सोते हुए पतिदेव के सुनकर इतने सुरीले तान ,
बड़े बड़े संगीतकार भी हो जाये हैरान परेशान,
कैसे निकाल लेते है इनके वो इतने अनूठे स्वर,
वह भी सिर्फ़ अपने मुख और नासिका के बल पर .
परसों रात की तो बात थी बहुत ही अलहदा,
क्योंकि पूरी और कचौरी से था पेट पूरा भरा,
लय और ताल का हो रहा था एक अलग ही संगम,
मुख और नासिका से लगातार चालू था अनोख़ा वंदन.
निकल रही थी इतनी सारी अजीब सी ध्वनि तरंग ,
जैसे बह रहा हो कोई झरना तेज़ बजाता हुआ मृदंग,
साथ में सुनाई दे रही थी किसी शेर या चीते की दहाड़,
पर बीच बीच में आ रही थी किसी मेमने की भी पुकार.
होकर बेहाल जगाया हमनें इन्हें सोते से आखिरकार,
बंदकर के अपने ख़र्राटे उठते ही बोले हमारे साहब,
क्या है जी बात जो तुम सोई नहीं हो गई इतनी रात,
बताते अपनी दुविधा उससे पहले ही छेड़ दी नई तान.
लगता था कह रहे हो हमें आज तो ना सोने देंगे तुम्हें,
जब तक ना मिलायोगी तुम हमारी धून में अपने भी स्वर,
या डाल लोगी आदत अपनी सुनने की रोज मेरा संगीत,
तब तक ना आ पायेगी आँखों में तुम्हारे चैन की नींद.
अब तो ढूंढ लिया है मैंने इनके खर्राटों में मज़ा अलग,
रोज रात रहती हूँ अपनी कल्पनाओ में बहुत व्यस्त,
सोचती हूँ बजाया नगाड़ा है या उठाया कोई वाद्य यंत्र,
जिससे पड़ती नहीं नींद में कुछ ज़्यादा खलल.
सोचती हूँ कैसे करते हैं मेरे वो इतने अनूठे काम,
बनाते है हर धुन पहले से कुछ अलग और स्वर जुदा ,
इनको सोते हुए सुनने का एक अलग ही है मजा,
नींद भी अब आती नहीं जब तक ना सुनु इनका अनूठा गान .
जय पतिदेव आप हैं महान!!!
सुरेखा
11.01.19
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