Yaddasth
याददाश्त
इतने जतन से सहेज कर रखा था जिसे कल यहां ,
बहुत ढूंढने पर भी वह चीज नहीं मिली वहां ,
अब याद भी आता नहीं कि वह रखी थी कहां I
घर का सारा सामान उलट-पुलट कर डाला ,
न हीं मिली वह चीज ना ही कुछ याद आया,
ना जाने उस चीज को वहाँ से किसने हटाया I
लो अब जाकर मिलगई वह चीज है,
जिसकी अब कोई जरूरत रही नहीं है।
पर जिसे अभी ढूंढ रही हूं वह चीज है कहां,
अब तो याद नहीं रहता कि ढूंढ रही हूं किसे और कहां,
भगवान जाने रोज-रोज का यह चक्कर खत्म होगा कहां I
आजकल ज्यादातर समय कुछ ना कुछ ढूंढने में जाता है,
इसलिए पता नहीं सारा वक्त कहां चला जाता है,
और जीवन के हसीन पल परेशानी में बदल जाते हैं I
लगता है कि अब बूढ़ी हो चली हूं,
जो चीजों को भूलती चली हूं,
नहीं अभी तो मैं जिंदगी जीने चली हूं I
क्या कर लूं अपनी जरूरतों को कम,
जिससे चीजों को ढूंढने में जाया होगा वक्त कम,
और जिंदगी जीने का मजा आएगा हरदम I
सुरेखा
इतने जतन से सहेज कर रखा था जिसे कल यहां ,
बहुत ढूंढने पर भी वह चीज नहीं मिली वहां ,
अब याद भी आता नहीं कि वह रखी थी कहां I
घर का सारा सामान उलट-पुलट कर डाला ,
न हीं मिली वह चीज ना ही कुछ याद आया,
ना जाने उस चीज को वहाँ से किसने हटाया I
लो अब जाकर मिलगई वह चीज है,
जिसकी अब कोई जरूरत रही नहीं है।
पर जिसे अभी ढूंढ रही हूं वह चीज है कहां,
अब तो याद नहीं रहता कि ढूंढ रही हूं किसे और कहां,
भगवान जाने रोज-रोज का यह चक्कर खत्म होगा कहां I
आजकल ज्यादातर समय कुछ ना कुछ ढूंढने में जाता है,
इसलिए पता नहीं सारा वक्त कहां चला जाता है,
और जीवन के हसीन पल परेशानी में बदल जाते हैं I
लगता है कि अब बूढ़ी हो चली हूं,
जो चीजों को भूलती चली हूं,
नहीं अभी तो मैं जिंदगी जीने चली हूं I
क्या कर लूं अपनी जरूरतों को कम,
जिससे चीजों को ढूंढने में जाया होगा वक्त कम,
और जिंदगी जीने का मजा आएगा हरदम I
सुरेखा
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