आज का फसाना


हुया पार्क में आज एक नया फसाना,
मॉर्निग वाक पर मिला कोई दोस्त पुराना,
लग रहा था उसका चेहरा कुछ जाना पहचाना,
हमने तो उसे नहीं पहचाना,
पर बातों ही बातों में कर दिया बया उसने हमारा पुराना अफ़साना,
फिर भी याद आया न वो, नाही हमने उन्हे पहचाना,
अगर पता चले आपको तो हमें भी उनका नाम बताना।

कह कर जुदा हुए कि शादी में तो थे मिले,
पर नहीं बताया कि किसकी शादी में और कँहा मिले।
सोच कर हो रही हूँ परेशान,
कि, कब की हमने शादी अटेंड जँहा इनसे हुई थी जान पहचान।

लगता है आज का दिन इसी कशमकश में जायेगा, 
कि देखा था इन्हे कँहा और कँहा हुई थी पहचान,
अब कोस रही हूँ खुद को क्यों फेकी मैंने ,
उनकी तरफ़ अपनी एक मीठी सी मुस्कान।

पर चलो मिला तो कुछ  लिखने को आज
नहीं तो सिर्फ दुआयों से चलाना पड़ता काम।

फिर कहती हूँ आप सबसे यही , 
मिल जाये यदि वो कंही या ,
याद आये उनका नाम तो हमें भी बताना।

सुरेखा
25 .12. 18

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