समय

समय
की बहुत कोशिश और लाख जतन,
कि बन्द करलू अपनी मुट्ठी में हर पलछीन।

क्या पता था जो बीत गया है पल,
वो वापस ना आयेगा,
और समय का चक्र,
बस ऐसे ही चलता जाएगा।

फिसल गया समय हाथों से मेरे  ऐसे,
कि ढह गई हो रेत की कोई दीवार जैसे,
खड़ी हूँ जब ऊम्र के इस पड़ाव पर मैं,
सोच रही हूँ, क्या पाया है मैंने,
और क्या है खोया।

समय को क़ैद करने की जद्दोजहद में इतना समझ में आया,
अगर बिता दिया बचा समय भी गिले शिकवों में,
तो मेरे हाथ कुछ नहीं आएगा।
समय तो बिताना है बितता ही जायेगा,
और कभी मेरी पकड़ में ना आएगा।

इसलिए जिओ जिंदगी को ऐसे, जिंदादिली के साथ,
कि हर पल में झलके आपके अलग अंदाज।

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